Est. 1960 · पुणे, India
संपादन विभाग
भारतीय फ़िल्म और टेलीविज़न संस्थान, पुणे
1960 में स्थापित, पुणे स्थित भा.फि.टे.सं. का संपादन विभाग भारत में फिल्म शिक्षा की एक आधारशिला रहा है, जिसने अनेक पीढ़ियों के अत्यंत कुशल संपादकों तथा कई प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं को आकार दिया है। यह विभाग अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिनमें उच्च-स्तरीय कंप्यूटर प्रणालियाँ तथा सुविचारित रूप से निर्मित संपादन कक्ष शामिल हैं, जो प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत कार्य-स्थान प्रदान करते हैं।
छात्रों को उद्योग मानक नॉन-लिनियर संपादन सॉफ़्टवेयर में व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें उन्नत ऑनलाइन संपादन सेटअप में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है, जिससे वे समकालीन निर्माणोत्तर (पोस्ट-प्रोडक्शन) कार्यप्रवाहों से पूर्णतः परिचित हो सकें। यह प्रशिक्षण संपादन संकाय सदस्य के निकट मार्गदर्शन में संचालित होता है। पाठ्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों द्वारा मास्टर कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं, जिससे छात्रों को प्रत्यक्ष संवाद और अनुभव-आधारित शिक्षण का अवसर मिलता है।
तकनीकी दक्षता से परे, शिक्षण पद्धति का विशेष बल सिनेमाई कला और सौंदर्यशास्त्र की गहन एवं सूक्ष्म समझ विकसित करने पर होता है। छात्रों को कथात्मक संरचना, लय, समयबोध तथा दृश्य और ध्वनि के संबंधों का आलोचनात्मक अध्ययन करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वे एक संपादक के रूप में आवश्यक बौद्धिक और कलात्मक संवेदनशीलता विकसित कर सकें। यह वैचारिक आधार उन्हें कल्पना, उद्देश्य और अमूर्त विचारों को सुसंगत दृश्य-श्रव्य अभिव्यक्तियों में रूपांतरित करने में सक्षम बनाता है, जिससे वे संपादन रेखा (एडिटिंग टाइमलाइन) पर रचनात्मक दृष्टि को स्पष्टता और उद्देश्यपूर्ण ढंग से साकार कर सकें
दशकों से इस विभाग ने अनेक उत्कृष्ट संपादक तैयार किए हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी रचनात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भा.फि.टे.सं. के संपादकों की नई पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए उच्च-गुणवत्ता का कार्य प्रस्तुत कर रही है, जो भारतीय सिनेमा को समृद्ध करने के साथ-साथ वैश्विक फिल्म समुदाय में भी अपनी पहचान बना रहा है।
- कार्यक्रम का नाम : संपादन मे विशेषज्ञता के साथ सिनेमा में ललित कला का स्नातकोत्तर
- विशेषज्ञता : संपादन
- कार्यक्रम अवधि : तीन वर्ष (छह सत्र)
- कुल क्रेडिट : 120
| संपादन मे विशेषज्ञता के साथ सिनेमा में ललित कला का स्नातकोत्तर | कुल क्रेडिट |
|---|---|
| पहला सत्र (आधारभूत) | 20 |
| दूसरा सत्र (विशेषज्ञता) | 20 |
| तीसरा सत्र (विशेषज्ञता) | 20 |
| चौथा सत्र (विशेषज्ञता) | 20 |
| पाँचवा सत्र (विशेषज्ञता) | 20 |
| छठवाँ सत्र (विशेषज्ञता) | 20 |
कार्यक्रम का परिचय
संपादन मे विशेषज्ञता के साथ सिनेमा में ललित कला का स्नातकोत्तर कार्यक्रम छात्रों को कथा (फिक्शन), गैर-कथा (नॉन-फिक्शन) से लेकर फीचर फिल्मों तक के संपादन की कला और शिल्प में गहन रूप से दक्ष होने का का अवसर प्रदान करता है। यह कार्यक्रम छात्रों को संपादन तकनीकों, संपादन के इतिहास, संपादन सिद्धांत तथा निर्माणोत्तर (पोस्ट-प्रोडक्शन) में अत्याधुनिक तकनीकों के अनुप्रयोग की गहरी समझ विकसित करने हेतु संरचित है। व्यावहारिक अनुभव, मार्गदर्शित मेंटरशिप तथा उद्योग विशेषज्ञों द्वारा संचालित मास्टर कार्यशालाओं के माध्यम से छात्र विभिन्न संपादन परिवेशों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करते हैं।
भा.फि.टे.सं. का यह सिनेमा में ललित कला का स्नातकोत्तर (संपादन) कार्यक्रम छह सत्रों में संचालित होता है।
- सत्र I : सिद्धांत एवं व्यवहार के माध्यम से सभी प्रमुख फिल्म निर्माण विधाओं में एक सामान्य आधारभूत प्रशिक्षण।
- सत्र II : सामूहिक रूप से फिल्म भाषा की आधारशिला, तकनीकी संपादन कौशल, दृश्य-श्रव्य एवं पूर्व-दृश्यांकन क्षमता का विकास तथा निर्देशन, संपादन, ध्वनि और छायांकन में सहयोगात्मक सहभागिता के माध्यम से समापन।
- सत्र III : संवाद संपादन, शैली-आधारित संपादन एवं ध्वनि-निर्माण, गीत एवं संगीत वीडियो संपादन, मूल ऑनलाइन संपादन (रंग-संशोधन सहित), विज्ञापन एवं वीएफएक्स कार्यप्रवाहों का परिचय तथा सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों सहित वृत्तचित्र संपादन.
- सत्र IV : पूर्व-दृश्यांकन, संपादक के रूप में मिज़-ऑन-सीन परियोजना, गैर-कथा दृश्य निबंध तथा बाह्य विशेषज्ञ द्वारा संचालित वृत्तचित्र मास्टरक्लास; साथ ही सिनेमा में स्नातकोत्तर पदविका(संपादन विशेषज्ञता) के साथ निकास का विकल्प।
- सत्र V : सेट पर डेटा प्रबंधन, निर्माणोत्तर (पोस्ट-प्रोडक्शन) कार्यप्रवाह, संपादक के रूप में वृत्तचित्र परियोजनाएँ, कथा फिल्मों पर दृश्य निबंध, दीर्घ-आकार कथा संपादन (आवश्यक आउटपुट सहित) तथा प्रचार सामग्री निर्माण हेतु नवीन मीडिया तकनीक।
- सत्र VI : उद्योग अनुभव पर केंद्रित अध्ययन यात्रा, प्रारंभ से अंतिम परिष्करण तक शोध-प्रबंध फिल्म का व्यावहारिक संपादन तथा दृश्य माध्यमों के माध्यम से सृजनात्मक रूप में प्रस्तुत शोध-आधारित प्रबंध।
कार्यक्रम के उद्देश्य
कार्यक्रम-विशिष्ट परिणाम (पीएसओ)
संपादन विशेषज्ञता का उद्देश्य छात्रों में सिनेमाई कहानी कहने के क्षेत्र में संपादन के माध्यम से सृजनात्मक, विश्लेषणात्मक और तकनीकी दक्षताओं का विकास करना है। यह कार्यक्रम छात्रों को पेशेवर संपादन तकनीकों के अनुप्रयोग, फिल्म निर्माण परिवेश में सहयोगात्मक कार्य तथा उद्योग-मानकों के अनुरूप तकनीकी रूप से सटीक एवं सौंदर्यात्मक रूप से प्रभावी दृश्य-श्रव्य रचनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाता है।
- फिल्म भाषा एवं सौंदर्यशास्त्र की उन्नत समझ।
- सिनेमाई कथाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण।
- सृजनात्मक एवं तकनीकी फिल्म निर्माण कौशल।
- फिल्म निर्माण में अंतर्विषयी सहयोग।
- डिजिटल उपकरणों एवं कार्यप्रवाहों में दक्षता।
- निर्देशक की दृष्टि की प्रभावी व्याख्या एवं रूपांतरण।
- आलोचनात्मक मूल्यांकन एवं शोध क्षमता।
- सशक्त समूहकार्य एवं नेतृत्व कौशल।
- मौलिक सिनेमाई कृतियों का सृजन।
- तकनीकी विशेषज्ञता एवं कार्यप्रवाह प्रबंधन।
- नवीन मीडिया एवं प्रौद्योगिकियों के प्रति अनुकूलन क्षमता।
- व्यावसायिक नैतिकता के साथ प्रभावी शोध संप्रेषण क्षमता।
संकाय सदस्य
- सुमित कुमार – प्राध्यापक & विभागाध्यक्ष
- अमलान चक्रवर्ती – सहायक प्राध्यापक
- देबाशीष सरकार – सहायक प्राध्यापक
- नारायणन ए.वी.– सहयोगी प्राध्यापक
- फणी किरण दमारा – सहायक प्राध्यापक

